मर्द मराठा - Mard Maratha (Panipat - 2019) Song Lyrics
Mard Maratha Song Lyrics - फिल्म "पानीपत" का खूबसूरत गीत "मर्द मराठा" Mard Maratha। गाने को अजय-अतुल, कुणाल गंजवाला, सुदेश भोसले, स्वप्निल बंदोदकर, पद्मनाभ गायकवाड़, प्रियंका बर्वे ने गाया है। गीत में जावेद अख्तर के बोल हैं, और संगीत अजय-अतुल का है। मुख्य कलाकार संजय दत्त, अर्जुन कपूर, कृति सनोन हैं।
मर्द मराठा - गाने के बोल हिंदी में
| गाना: मर्द मराठा |
| फिल्म: पानीपत |
| गायक: अजय-अतुल, कुणाल गंजावाला, सुदेश भोश्ले, स्वपनिल बांदोडकर, पद्मनाभ गायकवाड़, प्रियंका बर्वे |
| गीत: जावेद अख्तर |
| संगीतकार: अजय-अतुल |
| कलाकार: संजय दत्त, अर्जुन कपूर, कृति सनोन |
| लेबल: ज़ी म्यूजिक कंपनी |
हे बोले धरती जयकारा
गगन है सारा गूंजा रे
जग में लहराया न्यारा
ध्वज है हमारा ऊंचा रे
हम वो योद्धा वो निडर
हम जो भी दिशा में जाएं
सारे पथ चरण छुएं और
पर्वत शीश नवाये
रास्ते से हट जाएं
नदियां होके हवाएं
हम हैं जियाले जीतने को हम रन मैं उतरते हैं
हम सूरज हैं अंत हमी रातों का करते हैं
युग युग की जंजीरों को हमने ही काट रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
जो रक्त है तन में बहता
वो हमसे है ये कहता
सम्मान के बदले जान भी दें
तो नही है घाटा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
वीरता हमने बोई और ये फल पाया
दूर तक अब है फैली अपनी ही छाया
हो.. जीवन जो रणभूमि रे करता है तांडव
आज उसी ने है विजय का नगाड़ा बजाया
अपनी है जो गाथा अब है समय सुनाता
सब को है ये बताता कैसे सुख हमने बाटा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
हम्म, हम्म, हम्म, हम्म, हम्म
सच के सिपाही अलबेले राही
क्या जानते हो तुम
जब तुम नही थे हम कब यहीं थे
हम भी थे जैसे घूम
तुम ध्यान में थे तुम प्राण में थे
जैसे जन्म जन्म
जब तीर तुमपे बरसे तो
जैसे घायल हुए थे हम
हो.. देखो तो मुझसे कह के
मैं जान दे दूं तुम पे
क्या तुम नहीं ये जानते
दुविधा के आगे जब नारी जागे
हिम्मत से काम ले
चूड़ी उतार कंगन उतार तलवार थाम ले
मैंने ली आज शपथ है
वीरों का पथ है मेरा रे
लक्ष्य अपना जो बना लूँ
वहीं पे डालूं डेरा रे
हम वो योद्धा वो निडर
हम जो भी दिशा में जाएं
सारे पथ चरण छुएं और
पर्वत शीश नवाये
रास्ते से हट जाएं
नदियां होके हवाएं
हम हैं जियाले जीतने को हम
रन मैं उतरते हैं
हम सूरज हैं अंत हमी
रातों का करते हैं
युग युग की जंजीरों को हमने ही काट रे
बोल उठा ये जग सारा
जय मर्द मराठा रे
जो रक्त है तन में बहता
वो हमसे है ये कहता
सम्मान के बदले जान भी दें
तो नही है घाटा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
युग युग की जंजीरों को हमने ही काटा रे
बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे
